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Tuesday, September 2, 2025

मेजर जनरल नीलेन्द्र कुमार के साथ "उत्तराखंड में गांधी : यात्रा व विचार" पर चर्चा - 3

अप्रैल 1915 में गांधीजी पहली बार उत्तराखंड आए । उन दिनों हरिद्वार में कुंभ का मेला चल रहा था। उस दौरान गांधीजी ने भोजन संबंधी दो कठिन व्रत लिए, जिनका जिक्र उन्होने अपनी आत्मकथा में भी किया है । क्या थे वे व्रत,  यह बातचीत उसी पर रही ।  

पेश है इस बातचीत की तीसरी कड़ी।


#गांधी #उत्तराखंड #यात्रा #Gandhi #uttarakhand #meeting

https://youtu.be/5OfOL6wObKw?si=pMwObNwOE-A8ills

 

 

मेजर जनरल नीलेन्द्र कुमार के साथ "उत्तराखंड में गांधी : यात्रा व विचार" पर चर्चा - 4

गांधीजी का अपनी राजनीतिक यात्राओं के दौरान धन संग्रह जारी रहता था । जिस गाँव, कसबे व जिले से कितना धन संग्रह हुआ, इसका हिसाब वे प्रकाशित करवाते थे । वे बहुत बारीकी से इसका हिसाब रखते और खुद उसे जाँचते थे । उनका मानना था कि जब जनता हमें सहयोग देती है तो असल में वह हमें अपना विश्वास सौंप रही होती है, इसलिए उसकी रक्षा करना बहुत जरूरी है । उनकी इस आदत को उत्तराखंड के लोगों ने प्रत्यक्ष देखा । एक चर्चा ऐसी ही कुछ घटनाओं पर हुई ।

 #गांधी #उत्तराखंड #यात्रा #Gandhi #uttarakhand #meeting

https://youtu.be/7cnne8v8nj0?si=Rnwu7U1_NxC9fP2X

मेजर जनरल नीलेन्द्र कुमार के साथ "उत्तराखंड में गांधी : यात्रा व विचार" पर चर्चा - 5

गांधीजी अपनी राजनीतिक यात्राओं के दौरान एक सभा महिलाओं, दलितों व छात्रों की जरूर रखवाते थे । यह कहीं-न-कहीं उनका समाज के इन हलकों को मुख्य राजनीतिक धारा में लाने का एक तरीका था । इस बार की चर्चा में उत्तराखंड की सभाओं में महिलाओं की भागीदारी और उससे जुड़े किस्सों पर बात हुई।

 #गांधी #उत्तराखंड #यात्रा #Gandhi #uttarakhand #meeting


https://youtu.be/BGxRRU2i6H8?si=Ls3uGxKR6ILJjdKf

 


Monday, March 13, 2023

 'गांधी शांति प्रतिष्ठान' की पत्रिका 'गांधी-मार्ग' के जनवरी-फरबरी 2023 अंक में प्रकाशित मेरा एक आलेख, जो महात्मा गांधी के मसूरी प्रवास व देहरादून आगमन (1946) पर आधारित है । 

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=pfbid02YJjUh99hc2HkV5pSzfMUDJkREsoyWejnmxN1W1JnLecHaDww6Uc4pjjs5izt1gzSl&id=100000353412963&mibextid=Nif5oz

Saturday, March 20, 2021

Phooldei – Promoting book reading among children – A talk with Dwijendr...

फूलदेई उत्तराखंड में बसंत के आगमन पर नौनिहालों द्वारा मनाया जाने वाला एक लोक पर्व है जिसमें बसंत के स्वागत के लिए बच्चे घरों की दहलीज पर फूल डाल कर शुभत्व की कामना से इस उत्सव को मानते हैं। पूर्णतः बच्चों का ये उत्सव स्वयं में प्रकृति से जुड़ाव और रंगों का अद्भुत पर्व है। 14 मार्च  से 14 अप्रैल तक चलने वाले इस पर्व को  धाद बच्चों को रचनात्मकता से जोड़ कर मना रही है। इस क्रम में बाल-साहित्य से जुड़े रचनाधर्मियों से बातचीत करना भी शामिल है ।

20 मार्च 2021 को हमारी बात हुई पिछले 20 वर्षों से बाल साहित्य से जुड़े द्विजेंद्र कुमार से। उन्होंने सम्पादन, अनुवाद व लेखन के अलावा 100 से ज्यादा विशिष्ट कार्यशालाएं आयोजित की हैं। बाल पुस्तकों, पत्रिकाओं व कार्यशालाओं पर उनके अनुभव व विचारों पर उनसे बात की सुनील भट्ट ने ।

 

Thursday, July 6, 2017

सारी दुनिया गलत करे, करने दे न यार!

सारी दुनिया गलत करे, करने दे न यार!
मैं काहे को गलत करूं, उत्तम यही विचार
 
यह दुनिया आदर्श नहीं, ना कल थी ना आज
तेरे-मेरे सद्कर्मों से, सुंदर बने समाज
 
कुछ लोगों को भ्रष्ट देख, काहे तू मुस्काय 
हर इक बंदा भ्रष्ट नहीं, पूरी नज़र फिराय
 
देख चालाकी जगत की, काहे तू घबराय
वो जग को मैला करें, तू सुंदर इसे बनाय
 
मन को तू मजबूत कर, मन को ना बिसराय
मन से ताकत लेकर, मन मजबूत बनाय